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सादगी, समर्पण, प्रकृति के प्रति कृतज्ञ जून के पर्व - नीलम भागी

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सादगी, समर्पण, प्रकृति के प्रति कृतज्ञ जून के पर्व - नीलम भागी लेखिका, जर्नलिस्ट, ब्लॉगर एवं ट्रेवलर

जून की भीषण गर्मी में हमारे उत्सव पर्यावरण का महत्व समझाते हुए हमसे मानसून का स्वागत भी करवाते हैं।

जगह-जगह आम महोत्सव मनाने की शुरुआत हो जाती है। जून के पहले सप्ताह में शिमला समर फेस्टिवल मनाया जाता है। इस प्रसिद्ध त्यौहार में खेलकूद की गतिविधियां, फैशनेबल कपड़ों, हैंडिक्राफ्ट वस्तुओं और व्यंजनों, फूलों की, कुत्तों की प्रदर्शनी लगती है। हवा में कलाबाजियां और लाइव फैशन शो का प्रदर्शन होता है। 19 साल बाद दुर्लभ संयोग के कारण, इस वर्ष मई-जून में कुल 8 बड़े मंगल पड़ रहे हैं। बुढ़वा मंगल (या बड़ा मंगल) के कुल चार महत्वपूर्ण त्यौहार हैं, जो ज्येष्ठ माह के अंतर्गत आते हैं। मई में मना चुके हैं और इस माह के 2, 9, 16, और 23 जून हैं। बुढ़वा मंगल को संकटमोचन हनुमान जी तथा बालाजी मंदिर में सुन्दरकांड, हनुमान चालीसा का पाठ कर, चोला चढ़ाया जाता है। हनुमान भक्त जगह-जगह भंडारे, लस्सी, ठंडाई एवं प्याऊ की व्यवस्था करते हैं।

परमा एकादशी 11 जून, को मनाई जाएगी, यह एकादशी अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) के कृष्ण पक्ष में आती है और 3 साल में एक बार पड़ती है। यह विशेष व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है, जिसमें पूजा और उपवास से अपार पुण्य प्राप्त होता है।

ओडिशा में राजा संक्रांति समारोह मानसून के शुरुआत का तीन दिवसीय (14 से 16 जून) उत्सव है। इसे 'स्विंग फेस्टिवल' भी कहते हैं, जगह-जगह पेड़ों पर झूले जो पड़ जाते हैं। पृथ्वी पर नंगे पांव भी नहीं चलते क्योंकि ऐसा माना जाता है कि मानसून की बारिश से पहले पृथ्वी को आराम दिया जाना चाहिए। महिलाएं घर के काम से छुट्टी लेतीं हैं और किसान खेती से। दूसरे दिन को 'सजबजा' कहते हैं। इसमें सिलबट्टे को सजा कर रखते हैं। हिंदू, देवी धरती के प्रतीक सिल को हल्दी का लेप लगा कर महिलाओं द्वारा स्नान कराया जाता है। धरती मां को फलों का भोग लगाया जाता है। बारिश का स्वागत करने के लिए सब एक साथ आते हैं। समापन 16 जून को इस विश्वास से कि धरती मां के आशीर्वाद स्वरूप अच्छी पैदावार होगी।

ओचिरा कलि मंदिर से जुड़ा केरल का एक वार्षिक उत्सव है। जो पुराने समय में हुई एक लड़ाई की याद में लोग मनाते हैं। जिसमें दो समूहों, कायाकुलम और अलाप्पुझा के बीच लड़ाई हुई थी। मलयालम में 'कलि' का अर्थ खेल होता है। ओचिरा कलि में पुरुष और लड़के पानी से भरे धान के खेत में नकली लड़ाई करते हैं। संगीतमय यह लड़ाई प्रतिभागियों के शारीरिक कौशल का प्रदर्शन है। 15, 16 जून को इसका आनंद उठाने के लिए पर्यटक पहुंचते हैं। यहां की अनोखी रस्म है 'बैलों की पूजा' क्योंकि शिव का वाहन नंदी बैल है।

जनिता चोपनेता च, यस्तु विद्यां प्रयच्छति । अन्नदाता भयत्राता, पंचैते पितरः स्मृताः ।।

फादर डे मनाने से पहले भी हमारे पुराण में इन पांच को पिता के लिए कहा जाता था जन्मदाता, उपनयन करने वाला, विद्या देने वाला, अन्नदाता और भयत्राता।

न तो धर्मचरणं किंचिदस्ति महत्तरम् । यथा पितरि शुश्रूषा तस्य वा वचनक्रिया ।।

पिता की सेवा अथवा उनकी आज्ञा का पालन करने से बढ़कर कोई धर्माचरण नहीं है। वाल्मीकि रामायण सिख समुदाय में गुरु परंपरा के पांचवें गुरु अर्जुन देव का शहीदी दिवस 18 जून को उनकी शहादत को याद करने के लिए मनाते हैं। गुरु अर्जुन देव जी सिख धर्म के पहले शहीद हैं। इन्होंने धर्म के लिए अपनी शहादत दी। इनके शहीदी दिवस पर जगह-जगह ठंडे र्शवत की छबीलें लगाई जाती हैं। गुरु जी ने सिखों को अपनी कमाई का दसवां हिस्सा थार्मिक और सामाजिक कार्यों में लगाने के लिए प्रेरित किया।

भारत द्वारा प्रस्तावित अंतर्राष्ट्रीय योग -

दिवस का रिकॉर्ड 175 सदस्य देशों द्वारा इसका समर्थन किया गया। संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव पर 21 जून अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रुप में घोषित किया गया। इसका उद्देश्य योगाभ्यास करने के लाभ के बारे में विश्व की जागरुकता बढ़ाना है। योग और संगीत दोनों तनाव दूर करते हैं। हमारे मन को शांत रखते हैं। कहते हैं संगीत हर मर्ज की दवा है। मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए म्यूजिक थैरेपी बहुत कारगर है। संगीत की विभिन्न खूबियों की वजह से विश्व में एक दिन संगीत के नाम है। 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय संगीत दिवस भी मनाया जाता है।

हर वर्ष जून पूर्णिमा के दिन जम्मू और कश्मीर के लेह में सिंधु दर्शन महोत्सव का 22 से 27 जून तक आयोजन किया है। जिसमें बड़ी संख्या में विदेशी और घरेलू पर्यटक आते हैं। सिंधु दर्शन समारोह के आयोजन का मुख्य कारण सिंधु नदी को भारत के सांप्रदायिक सद्भाव और एकता के प्रतीक के रुप में समर्थन करना है। सिंधु दर्शन लेह के मुख्य शहर से 8 किमी. दूर स्थित शीला मनला में मनाया जाता है।

दस दिवसीय गंगा दशहरा का पर्व हर साल ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 22 जून को मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन राजा भागीरथ के कठोर तपस्या के चलते मां गंगा का अवतरण पृथ्वी पर हुआ था। दशहरा का अर्थ 10 मनोविकारों के विनाश से है। कोच, लोभ, मोह, मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी है। हिंदू धर्म में गंगा दशहरा पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन गंगा जी में स्नान करना अपना सौभाग्य समझा जाता है। जहां पर जो भी नदी होती है, अद्धालू उसकी पूजा अर्चना कर लेते हैं क्योंकि नदियां हमारी संस्कृति की पोषक हैं।

गोवा में साओ जोआओ 24 जून को मानसून आगमन के साथ ही खास तौर पर मछुआरा समूह द्वारा मनाया जाता है। नाच गाना और तरह-तरह के रंगारंग कार्यक्रमों द्वारा आपस में मनोरंजन करते हैं। ये उत्सव यहां का खास आकर्षण है। 

सिख समुदाय में गुरु परंपरा के पांचवें गुरु अर्जुन देव का शहीदी दिवस 18 जून को उनकी शहादत को याद करने के लिए मनाते हैं। गुरु अर्जुन देव जी सिख धर्म के पहले शहीद है। इन्होंने धर्म के लिए अपनी शहादत दी। इनके शहीदी दिवस पर जगह-जगह ठंडे शर्बत की छबीलें लगाई जाती हैं। गुरु जी ने सिखों को अपनी कमाई का दसवां हिस्सा धार्मिक और सामाजिक कार्यों में लगाने के लिए प्रेरित किया।

हिंदू धर्म में 24 एकादशियों का बहुत महत्व है। ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी, 25 जून को निर्जला एकादशी कहते हैं। इसकी कथा में हिंदू धर्म की बहुत बड़ी विशेषता है कि वह सबको धारण ही नहीं करता है, सबके योग्य नियमों की लचीली व्यवस्था भी करता है। महर्षि वेदव्यास ने पांडवों को एकादशी व्रत का संकल्प कराया तो भीम ने कहा, "पितामह इसमें प्रति पक्ष एक दिन के उपवास की बात कही है। पर मैं तो एक समय भी भोजन के बगैर नहीं रह सकता। मेरे पेट में 'वृक' नाम की जो अग्नि है उसे शांत रखने के लिए मुझे कई लोगों के बराबर और कई बार भोजन करना पड़ता है। 


क्या अपनी उस भूख के कारण मैं एकादशी जैसे पुण्य व्रत से वंचित रह जाऊंगा?" यह सुनते ही महर्षि ने भीम का मनोबल बढ़ाते हुए कहा, "आप ज्येष्ठ मास की निर्जला नाम की एकादशी का व्रत करो। तुम्हें वर्ष भर की एकादशियों का फल मिलेगा।"

पनिहाटी में प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ शुक्ल की त्रयोदशी, 27 जून को दही चूड़ा का विशेष भोज होता है। इस 500 साल से चलने वाले 'दंड महोत्सव' का विशेष विधान है। जो 'दही चूड़ा महोत्सव' कहलाता है। पश्चिम बंगाल में कलकत्ता से 10 किमी. दूर पनिहाटी गांव गंगा तट पर है। सोलहवीं शताब्दी में चैतन्य महाप्रभु संकीर्तन का यह प्रमुख केंद्र बन गया। प्रभु भक्त रघुनाथ दास, प्रभु नित्यानंद के दर्शनों के लिए पानीहाटी गए। जहां प्रभु गंगा के तट पर बरगद के नीचे अपने शिष्यों से घिरे बैठे थे। रघुनाथ झिझक के मारे पेड़ के पीछे छिप कर उनके दर्शन कर रहे थे। प्रभु नित्यानंद ने उन्हें देख कर कहा, "रघुनाथ दास! तुम चोर की तरह छिपे हो! और मैंने तुम्हें पकड़ लिया। यहां आओ, मैं तुम्हें दंड दूंगा।" और दंड स्वरूप बड़ा उत्सव कर, भक्तों को दही-चावल परोसने का आदेश दिया। अब चिलचिलाती गर्मी में सेठ ने बड़ी खुशी से उसमें फल मेवे मिलाकर लाजवाब प्रसाद बनाया। इस अद्भुत दंड की याद में यह उत्सव मनाया जाता है।

15वीं शताब्दी के प्रसिद्ध समाज सुधारक, कवि, संत का जन्म ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा, 28 जून को हुआ था, जिसे कबीर प्रकाश दिवस के रूप में मनाया जाता है। कबीर अंधविश्वास और अंधश्रद्धा के प्रथम विद्रोही संत हैं। जगह-जगह होने वाले कार्यक्रमों में इनके दोहे गाए जाते हैं।

हमारे देश में साल का छठा महीना जून सबसे गर्म होता है। भारत में मेलों, उत्सवों और महापुरुषों के कारण जून बहुत मुख्य है। इन सभी उत्सवों, व्रत और विशेष दिनों को मनाते हुए, हमें प्रयास करना चाहिए कि हम सामाजिक चेतना भी आए। 


लेखक - नीलम भागी, जर्नलिस्ट, ब्लॉगर एवं ट्रेवलर