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सृजन और सामाजिक चेतना की प्रेरणा

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सृजन और सामाजिक चेतना की प्रेरणा 

अयोध्या (फैजाबाद) में जन्मीं रेखा चौरसिया ने बचपन से ही अपनी लगन, मेहनत और बहुमुखी प्रतिभा के बल पर शिक्षा, खेल, कला, साहित्य, मंच संचालन, समाज सेवा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। कठिन परिस्थितियों को अपने साहस, धैर्य और प्रतिभा से मात देने वाली रेखा का जीवन संघर्ष, साधना और सफलता की एक प्रेरक मिसाल है। आज साहित्य, मंच, समाज सेवा, कला और नारी शक्ति की ऐसी प्रेरक आवाज हैं, जो अपने लेखन, वाणी और कर्म से समाज में सकारात्मक चेतना की अलख जगा रही हैं।

सन 1978 में जन्मीं रेखा जी ने छात्र जीवन से ही अपनी प्रतिभा का परिचय देना शुरू कर दिया था। वे कनोसा कॉन्वेंट गर्ल्स इंटर कॉलेज, फैजाबाद की छात्रा रहीं और विद्यालय की हेड गर्ल भी चुनी गईं। हॉकी में उन्होंने जनपदीय और मंडलीय स्तर पर अनेक पुरस्कार प्राप्त किए तथा राज्य स्तर तक चयनित होकर अपनी खेल प्रतिभा सिद्ध की। सन 1995 में 10वीं बोर्ड परीक्षा से मात्र 20 दिन पहले उनकी माता श्रीमती सरला देवी चौरसिया का निधन हो गया, परन्तु इस गहरे आघात के बाद भी रेखा जी ने हार नहीं मानी। उन्होंने परीक्षा दी और सर्वाेच्च अंक प्राप्त किए, जिसके लिए तत्कालीन शिक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह जी द्वारा उन्हें गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया।

कला और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी रेखा जी की उपलब्धियां उल्लेखनीय रही हैं। पोस्टर मेकिंग, स्लोगन राइटिंग, ड्राइंग, मेंहदी, रंगोली, फैंसी ड्रेस तथा अन्य प्रतियोगिताओं में उन्होंने अनेक प्रमाण पत्र और पुरस्कार प्राप्त किए। वर्ष 1995 में उन्होंने सर्वश्रेष्ठ नृत्यांगना का खिताब जीता। इसी वर्ष उन्हें मिस टीनएजर का सम्मान मिला और वर्ष 1997 में वे मिस फैजाबाद की रनर-अप रहीं। शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्होंने निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 1997 की इंटरमीडिएट परीक्षा में सर्वाधिक अंक प्राप्त कर परिवार और समाज का नाम रोशन किया।

लेखन और साहित्य के क्षेत्र में रेखा चौरसिया की पहचान अत्यंत सशक्त रही है। पिछले लगभग 35 वर्षों से वे कविता, लेख और समसामयिक विषयों पर निरंतर लेखन करती रही हैं। रेखा चौरसिया की पुस्तक ”नफरत करो मुझसे मैं औरत हूं“ का प्रकाशन प्रयागराज से हुआ, जिसका विमोचन न्यायिक और शैक्षणिक जगत की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। नारी सशक्तिकरण और देशभक्ति पर उनके लेखन को अनेक मंचों पर सराहा गया। जयपुर से उन्हें ”हिन्द शिरोमणि सम्मान“, मिर्जापुर की सांसद श्रीमती अनुप्रिया पटेल जी द्वारा ”मातृ शक्ति वंदन पुरस्कार“ तथा लखनऊ के हिंदी संस्थान के निराला सभागार में ”भारत भाग्य विधाता सम्मान“ से सम्मानित किया गया।

मंच संचालन के क्षेत्र में भी रेखा जी ने विशेष पहचान बनाई। दिल्ली के बाबा साहब भीमराव अंबेडकर भवन में उन्होंने 8.30 घंटे का निरंतर मंच संचालन कर रिकॉर्ड बनाया और वरिष्ठ राजनीतिक हस्तियों द्वारा ”कबीर कोहिनूर सम्मान“ से सम्मानित हुईं। दिल्ली के एडवोकेट्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया के सत्र का मंच संचालन भी उन्होंने NDMC के विशेष प्रांगण में किया, जिसका सीधा प्रसारण दूरदर्शन पर हुआ। इसके अतिरिक्त उन्होंने रेडियो इंडिया 50़ पर ”RJ रेखा“ के रूप में ”इन्द्रधनुषी रेखा“ नाम से कई कार्यक्रमों का प्रसारण किया। उन्होंने अपनी प्रभावशाली वाणी, सकारात्मक सोच और सामाजिक दृष्टिकोण को श्रोताओं तक पहुंचाया। स्वरचित गीत, ‘अयोध्या मंगल गान’ यू ट्यूब पर लगभग 9K व्यूअर्स हैं, देश और विदेश में एक अलग ही पहचान देने में सहायक हुआ। अपने मानव जिजीविषा में नैतिक मूल्यों को सर्वाेपरि रखने के लिए तत्पर रहना ही जीवन को सार्थकता प्रदान करना ही आपका उद्देश्य रहा जिससे आपके व्यक्तित्व को सभी लोगों ने सराहा।

रेखा जी अपनी हर सफलता का श्रेय अपने पिताजी स्वर्गीय श्री लाल जी प्रसाद चौरसिया को देती हैं। उनका विश्वास है कि एक स्त्री यदि अपनी ऊर्जा का सही प्रयोग करे, निरंतर सीखती रहे और अपने प्रयासों से आगे बढ़ती रहे, तो वह अपनी सफलता का इतिहास स्वयं लिख सकती है।विवाह के 27 वर्षों के पूर्ण होते साथ ही एलएलबी की डिग्री प्राप्त करने वाली रेखा जी आर्या पब्लिक स्कूल, प्रयागराज की प्रिंसिपल भी रह चुकी हैं।निजी जीवन में असहाय, गरीब बच्चों की सहायता, वस्त्र और भोजन वितरण तथा लावारिस पशुओं की सेवा उनके प्रिय कार्यों में शामिल हैं।