• अनुवाद करें: |
विशेष

राष्ट्र जागरण में महिलाओं की भागीदारी

  • Share:

  • facebook
  • twitter
  • whatsapp

राष्ट्र जागरण में महिलाओं की भागीदारी

प्राचीन भारत में सीता, सावित्री, अरुंधती, लोपामुद्रा, अपाला और अनुसूया जैसी अनेक विदुषी एवं ब्रह्मवादिनी स्त्रियों ने अपनी भागीदारी से समाज और राष्ट्र जागरण में अप्रितम योगदान दिया है। कालांतर में समय के कुचक्र ने समानता, बंधुत्व और ज्ञान की धारा को दिशाहीन करने की कोशिश की, लेकिन पुनः सनातन संस्कृति के मूल्यों और कुशल नेतृत्व में राष्ट्र जागरण में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है। वैसे भी जिन राष्ट्रों में महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करतीं हैं, सम्मानित जीवन जीती हैं और कर्मठता के साथ परिवार, समाज व राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करतीं हैं, वह राष्ट्र सदैव उन्नति करता है।

महिला जीवन की धुरी है, आदि शक्ति है। महिलाओं के बिना जीवन की परिकल्पना ही असंभव है। जिन राष्ट्रों में महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करतीं हैं, सम्मानित जीवन जीती हैं और कर्मठता के साथ परिवार, समाज व राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करतीं हैं, वह राष्ट्र सदैव उन्नति करता है। ऐसा राष्ट्र न तो कभी पराधीन हो सकता और न कभी पिछड़ सकता है। इजराइल और जापान जैसे छोटे राष्ट्र इसके ज्वलंत उदाहरण हैं। इजराइल अपने चारों ओर से शत्रुओं से घिरा हुआ है, किंतु फिर भी कोई मुल्क न उसे दबा पाया और न ही उसे तोड़ पाया। इसका मूलभूत कारण यह है कि इजराइल के विकास और जागरण में स्त्री-पुरुष दोनों का समान रूप से योगदान है। इजराइली स्त्रियां पुरुषों के समान ही गन और बंदूकों से सुसज्जित हो राष्ट्र की सुरक्षा करती हैं। इसी प्रकार जापान भी कम चुनौतियों का शिकार नहीं रहा है। जापान दुनिया का पहला ऐसा मुल्क है जिस पर परमाणु बम से हमला किया गया। आए दिन जापान समुद्री सुनामी तथा भूकंप जैसे प्राकृतिक आपदाओं का शिकार होता रहता है। फिर भी जापान गिर-गिर कर खड़ा हो जाता है, जागृत हो उठता है, क्योंकि वहां राष्ट्र जागरण में महिलाओं की समान भागीदारी है। वहां की कर्मठ महिलाएं देश हित में बढ़-चढ़ कर कार्य करतीं हैं। परिणाम सबके समक्ष है। जापान प्रत्येक दृष्टि से एक विकसित राष्ट्र है। इसके विपरीत ईरान, इराक, अफगानिस्तान, पकिस्तान आदि वो राष्ट्र हैं, जहां नारी शक्ति को दबा कर रखा जाता है। ऐसे राष्ट्र पिछड़ेपन,  अज्ञानता व दरिद्रता के अंतिम पायदानों पर खड़ें हैं। अतः स्पष्ट है कि राष्ट्र जागरण में महिलाओं की महती भूमिका है। 

वहीं भारत वर्ष एक संपन्न परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों से समृद्ध देश है, जहां महिलाओं का समाज व राष्ट्र में प्रमुख स्थान रहा है। दुर्भाग्य से विदेशी शासनकाल में समाज में अनेक कुरीतियां व विकृतियां पैदा हुईं, जिससे महिलाओं का बहुत उत्पीड़न हुआ। स्वतंत्रता के बाद महिलाओं की समाज में भागीदारी बढ़ी व उनका सम्मान भी बढ़ा, किंतु उनके सशक्तिकरण की गति दशकों तक बहुत ही धीमी रही। गरीबी व निरक्षरता उनकी प्रगति में बड़ी बाधक बनी। भारतीय महिलाएं ऊर्जा से पूर्ण, दूरदर्शिता, जीवंत, उत्साहित और प्रतिबद्धता के साथ समस्त चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हैं। भारत के प्रथम नोबल पुरस्कार विजेता रवींद्र नाथ टैगोर के शब्दों में, ‘हमारे लिए महिलाएं न केवल घर की रोशनी हैं, बल्कि इस रोशनी की लौ भी हैं।’  अनादि काल से ही भारत के राष्ट्रीय जागरण में महिलाएं प्रेरणा का स्रोत रहीं हैं। प्राचीन भारत में सीता, सावित्री, अरुंधती, लोपामुद्रा, अपाला और अनुसूया जैसी महान स्त्रियों नें अपने ज्ञान के माध्यम से मानव जीवन को एक सकारात्मक मार्ग दिखाया। बाद के समय में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई से लेकर भारत की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले तक सभी ने राष्ट्र जागरण में महती भूमिका निभाई हैं। मिताली राज, पीवी सिंधू, मैरी काम, अवनि लेखरा जैसी महिलाओं खिलाड़ियों ने न केवल राष्ट्रीय मान को बढ़ाया है, बल्कि संदेश भी दिया है कि तमाम अवरोधों के बावजूद भी महिलाएं कठिन से कठिन कार्य करने का साहस रखतीं हैं। इसी श्रृंखला में अनेक नाम हैं जैसे पहली महिला कमर्शियल पायलट कैप्टन प्रेमा माथुर, पहली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी, सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला न्यायाधीश फातिमा बीबी, भारतीय नौसेना में लेफ्टिनेंट जनरल पद तक पहुंचने वाली पहली महिला पुनीता अरोड़ा, पहली एक बिलियन नेटवर्थ वाली भारतीय महिला बिजनेसमैन किरण मजुमदार शा, पहली भारतीय महिला चिकित्सक आनंदी बाई गोपालराव, संतोष यादव पहली महिला, जिसनें हिमालय फतह किया। इस तरह अनेक महिलाओं ने राष्ट्र के उत्थान और जागरण के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए। इसी कड़ी में गणतन्त्र दिवस परेड पर पहली बार तीनों सेनाओं की महिला टुकड़ियों का मार्च रहा। परेड में 48 महिला अग्निवीरों ने करतब दिखाए। इसके साथ ही महिला फाइटर पायलटों ने भी अपने हैरतअंगेज साहस का परिचय दिया। परेड की शुरुआत भी 100 महिला कलाकारों द्वारा वाद्यों के साथ हुई। इस बार झांकियों से लेकर परेड और थीम तक के केन्द्र में महिलाएं रहीं। संदेश स्पष्ट है कि भारत के पुनर्निर्माण और जागरण मे महिलाओं की महती भूमिका होने वाली है, क्योंकि राष्ट्र जागरण में जितनी भागीदारी पुरुषों की होती है उतनी महिलाओं की भी।

दुनिया के विकसित और विकासशील देशों में अंतर यही होता है कि वहां महिलाएं साक्षर, स्वस्थ और जागरूक होती हैं, जबकि विकासशील देशों में महिलाओं के सर्वांगीण विकास को नज़रअंदाज किया जाता है। इसलिए उन्हें विकसित होने में अधिक समय लग जाता है। महिला ही राष्ट्र में अच्छे नागरिक गढ़ने की मूलभूत इकाई होती है। चाहे शिक्षा का क्षेत्र हो, चिकित्सा का या विकास के अन्य कार्य हों, महिलाओं की सहभागिता के बिना राष्ट्र का विकास संभव ही नहीं। यदि इस मूलभूत इकाई का ही ध्यान नहीं रखा जाएगा, तो राष्ट्र जागरण कैसे संभव होगा। महिलाओं में जन्मजात नेतृत्व गुण समाज और राष्ट्र के लिए संपत्ति है। यही कारण है कि जब हम एक पुरुष को शिक्षित करते हैं, तो केवल एक व्यक्ति शिक्षित होता है किंतु यदि हम एक महिला को शिक्षित करतें हैं, तो समूची पीढ़ी को शिक्षित करतें हैं।

भारत में राष्ट्र जागरण में महिलाओं की भागीदारी बढ़े, इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं को शुरू किया है, जैसे स्टैंड अप इंडिया, स्टार्ट अप, महिला उद्यमिता मंच पोर्टल,  बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ आदि। 2030 तक राष्ट्र को मानवता का समान स्थान बनाने के लिए भारत सतत विकास लक्ष्यों की ओर तेजी से बढ़ चला है। लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण करना सतत् विकास लक्ष्यों में प्रमुख है। वर्तमान में प्रबंधन,  पर्यावरण संरक्षण, समावेशी आर्थिक और सामाजिक विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष ध्यान दिया गया है। महिलाओं की आधी आबादी है और इस आधी आबादी का राष्ट्र की उन्नति व जागरण में योगदान को नकारा नहीं जा सकता है।