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कंदकुरथी में ‘श्री केशव स्फूर्ति मंदिर’ का हुआ लोकार्पण

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हैदराबाद

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने शनिवार को संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी के पैतृक गांव कंदकुरथी में ‘श्री केशव स्फूर्ति मंदिर’ का लोकार्पण किया। गांव तेलंगाना राज्य के निजामाबाद में स्थित है। यह स्फूर्ति मंदिर डॉ. हेडगेवार जी के जीवन, दृष्टि और विरासत को एक प्रेरणा एवं स्मारक के रूप में स्थापित किया गया है।

प्रेरणा का केंद्र बनेगा स्फूर्ति मंदिर

सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत जी ने कहा कि यह स्मृति मंदिर एक ‘श्रद्धा केंद्र’ के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो स्वयंसेवकों और आगंतुकों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि कंदकुरथी ‘श्री केशव स्फूर्ति मंदिर’ के शुभारंभ के साथ, भारत और विदेशों में संघ के स्वयंसेवकों और डॉ. हेडगेवार जी के प्रशंसकों के लिए प्रेरणा का एक प्रमुख केंद्र बनने के लिए तैयार है। इस स्मारक की परिकल्पना राष्ट्र सेवा के प्रति भक्ति, अनुशासन और प्रतिबद्धता को बढ़ावा देने वाले स्थान के रूप में की गई है।

देशभक्ति की स्फूर्ति मिलेगी

उन्होंने कहा कि कंदकुरथी से देशभक्ति की स्फूर्ति मिलेगी। निस्वार्थ भाव से जीने की स्फूर्ति मिलेगी और समाज को अभाव से मुक्त करने का संकल्प मिलेगा। उन्होंने लोगों से इस स्थान के बारे में बताने, बार बार आने और यहां की मिट्टी से प्रेरणा ग्रहण करने का आह्वान किया।

समारोह के दौरान सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने अनेक महानुभावों को सम्मानित किया, जिनका जीवन और योगदान समाज में प्रेरणादायी है। अपनी यात्रा के दौरान डॉ. भागवत ने गांव के केशव मूर्ति, रुक्मिणी समेत विठ्ठलेश्वर और स्कंद मंदिरों के दर्शन भी किए।

अरुण योगिराज ने तैयार की मूर्ति

स्फूर्ति मंदिर के भूतल पर डॉ. हेडगेवार की प्रतिमा स्थापित की गई है, जिसके साथ एक फोटो गैलरी भी है। यह गैलरी उनके जीवन के महत्वपूर्ण चरणों एवं राष्ट्र पुनर्निर्माण के उनके दृष्टिकोण को प्रदर्शित है। प्रथम तल पर भारत माता की प्रतिमा स्थापित है। यहां एक वीडियो प्रस्तुति हॉल भी है, जिसमें डॉ. हेडगेवार जी के जीवन और वैचारिक यात्रा को दिखाया जाएगा। ‘संग्रहालय’ नामक एक अन्य हॉल में उनके द्वारा उपयोग की गई व्यक्तिगत वस्तुएं, उनके हस्तलिखित पत्रों की प्रतियां और उनके जीवन से संबंधित दुर्लभ पुस्तकें प्रदर्शित की जाएंगी। भारत माता और डॉ. हेडगेवार जी की प्रतिमाओं को मैसूर के प्रसिद्ध मूर्तिकार अरुण योगिराज ने तैयार किया है, जिन्होंने अयोध्या में रामलला की मूर्ति बनाई थी।


गांव का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व

गोदावरी, मंजिरा और हरिद्रा नदियों के संगम पर स्थित कंदकुरथी गांव ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दोनों महत्व रखता है। वर्तमान में यह गांव तेलंगाना के निजामाबाद जिले के अंतर्गत आता है। हैदराबाद से लगभग 210 कि.मी. तथा नागपुर से लगभग 380 किमी दूर स्थित है।पारंपरिक रूप से ‘स्कंदपुरी’ के नाम से ज्ञात इस गांव का संबंध भगवान सुब्रमण्य (स्कंद) से है। समय के साथ यह नाम बदलकर कंदकुरथी हो गया। ऐसी मान्यता है कि त्रेतायुग में अपने वनवास के दौरान भगवान श्रीराम ने इस क्षेत्र का दौरा किया था और छत्रपति शिवाजी महाराज ने भी कई बार इस गांव की यात्रा की थी। गांव में डॉ. हेडगेवार जी के कुलदेवता केशव स्वामी का मंदिर है। हाल ही में यहां प्राचीन स्कंद मंदिर का पुनर्निर्माण भी किया गया है। अप्रैल 2025 में समिति ने इसी गांव में श्री विघ्नेश्वर मंदिर, श्री सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर, श्री रुक्मिणी समेत विठ्ठलेश्वर मंदिर और श्री केशव स्वामी मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का सफल आयोजन किया था।