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प्रौद्योगिकी का उपयोग समाजहित में होना चाहिए – डॉ. मोहन भागवत जी

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छत्रपति संभाजीनगर, 17 जनवरी 2026

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने युवा उद्यमी संवाद में कहा कि प्रौद्योगिकी आज की अपरिहार्य आवश्यकता है। स्वदेशी का उपयोग करने का अर्थ प्रौद्योगिकी का त्याग करना नहीं है, किंतु हमें प्रौद्योगिकी का दास नहीं बनना चाहिए। हम उद्योग केवल अपने लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज के कल्याण के लिए करते हैं।

संघ शताब्दी वर्ष के अवसर पर सरसंघचालक जी ने समाज के विचारवंत, एवं प्रभावशाली व्यक्तियों के साथ प्रत्यक्ष संवाद किया। उन्होंने उपस्थित जनों द्वारा लिखित रूप में पूछे गए प्रश्नों एवं शंकाओं के उत्तर दिए। इस अवसर पर मंच पर प्रांत संघचालक अनिल जी भालेराव उपस्थित थे।

सरसंघचालक जी ने कहा, “प्रौद्योगिकी स्वयं में बुरी नहीं होती, किंतु हमें उसका दास नहीं बनना चाहिए। हम समाज की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कार्य करते हैं, जिससे हमारी आजीविका का साधन भी बनता है। हमारे यहाँ का किसान आज भी कहता है कि खेती करना मेरा धर्म है – ऐसा उदात्त विचार अन्यत्र दुर्लभ है। इसलिए हमें यह समझना चाहिए कि हमारा कार्य समाजोन्मुख है। आधुनिक प्रौद्योगिकी को देश की परिस्थितियों के अनुरूप अपनाया जाना चाहिए। इस बात का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए कि हमारी प्रौद्योगिकी से समाज को क्षति न पहुँचे और रोजगार के अवसर कम न हों।”

कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रशांत गायकवाड एवं पुष्कर दरगड ने किया। कार्यक्रम प्रातः 11.00 बजे समर्पण कार्यालय में संपन्न हुआ। प्रभु मते ने वैयक्तिक गीत प्रस्तुत किया तथा कल्याण मंत्र से कार्यक्रम का समापन हुआ।