सूचना विस्फोट का दौर और पत्रकारिता में नवाचार
समाज से संवाद का सबसे सशक्त माध्यम पत्रकारिता है। इसलिए सबसे ज्यादा चुनौतियां भी पत्रकारिता के सामने आती हैं। मान्यता रही है कि समय के साथ समाज बदलता है और उसी के अनुरूप संवाद का स्वरूप होता है। इसका अर्थ है कि समय के साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में भी बदलाव दिखना चाहिए। ऐसा होता भी आ रहा है। लेकिन, 21वीं सदी में समाज को समय से ज्यादा तकनीक के साथ चलना पड़ रहा है। पत्रकारिता को समय, समाज और तकनीक तीनों के बदलावों के साथ कदमताल मिलानी पड़ती है। यह अब तक की सबसे बड़ी चुनौती है जिससे पार पाने के लिए पत्रकारिता में नवाचार का दौर तेज हुआ जो निरंतर जारी है।
अच्छी बात यह है कि पाठकों, दर्शकों और श्रोताओं ने संवाद के सबसे विश्वसनीय माध्यम पत्रकारिता में नवाचार को अंगीकार करना भी शुरू कर दिया है। तभी सुबह अखबार पढ़ने के साथ आरंभ करने वाले पाठक अपने मोबाइल पर समाचार के नोटिफिकेशन की ओर भी हर वक्त आंख लगाए रखते हैं। पत्रकारिता में नवाचार का परिणाम है कि 24 घंटे समाचार देने वाले चैनल दो मिनट के वीडियो सोशल मीडिया पर फ्लैश करने लगे हैं। गाड़ी में लगे म्यूजिक सिस्टम पर 24 घंटे मनोरंजन परोसने का दावा करने वाले एफएम चैनल भारतीय पौराणिक कथाओं पर पॉडकास्ट चलाने लगे हैं। यह नवाचार पत्रकारिता और समाज दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है।
दुनिया के प्रतिष्ठित संस्थानों में पिछले कुछ वर्षों में जितने भी शोध संवाद, समाचार और विचार के प्रेषण को लेकर हुए हैं, उनमें सबसे ज्यादा रिसर्च पेपर पत्रकारिता में नवाचार और नवोन्मेष पर सामने आए हैं। ज्यादातर शोध का निष्कर्ष है कि सूचना विस्फोट के दौर में समाज को सही समाचार पहुंचाने के लिए पत्रकारिता में नवोन्मेष और नवाचार बहुत जरूरी है।
वर्तमान में तीन तरह के नवाचार पत्रकारिता में चल रहे हैं। तीनों पर नजर रखने वाले संस्थान और माध्यम समाज में अपनी भूमिका निभा पाएंगे। इनमें पहला है- तकनीक में नवाचार, दूसरा है समाचार संकलन और समाचार प्रेषण में नवाचार, तीसरा है यूजर्स की सहभागिता के लिए नवाचार। इन तीनों के साथ कदम मिलाकर चलने वाली पत्रकारिता ही डिजिटल, मोबाइल और ऐप के इर्दगिर्द घूम रही नई पीढ़ी की जरूरतों को पूरा कर सकेगी। इन नवाचारों ने एकतरफा संवाद को कम करके पाठकों, श्रोताओं और दर्शकों को प्रतिक्रिया का ज्यादा अवसर दिया है। जाने माने पत्रकार रामकृपाल सिंह का मानना है कि पत्रकारिता में हो रहे नवाचार ने भाषा, ज्ञान और रीडर्स तक पहुंच की दिशा में बहुत बड़ा और सकारात्मक योगदान दिया है।
तकनीक में नवाचार और पत्रकारिता: तकनीक में नवाचार का मुख्य (पहला) उद्देश्य रहा है तमाम तरह के संप्रेषण माध्यमों और विधियों को एक मंच पर लाना जिससे पत्रकारिता के मूल्यों और मूल भावना को संरक्षित रखा जा सके। नवोन्मेष का दूसरा पहलू रहा है सूचना देने वाले और उसे ग्रहण करने वाले के बीच की दूरी और समय को कम करना। इसे पत्रकारिता की भाषा में रियल टाइम प्रस्तुति कहते हैं। सोशल मीडिया जब लोगों के लिए अभिव्यक्ति का आधार बन गया तो समाचार प्रदाता संस्थानों और पत्रकारों को इस दशा में भी नवाचार करना पड़ा। लोगों के आपस में जुड़ने का माध्यम सोशल मीडिया बना तो अपने समाचारों और विशेष प्रस्तुतियों को जनमानस तक ले जाने के लिए संस्थानों को ऐसी तकनीक बनानी पड़ी कि खबर फाइल होते ही वेबसाइट और सोशल मीडिया पर आ जाती है। इससे बढ़कर, ऐसी तकनीक भी विकसित करनी पड़ी कि आपके सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर उस खबर का नोटिफिकेशन भी आ जाता है। यही तकनीकी नवाचार मीडिया संस्थानों को कंटेंट सुधारने से लेकर प्रस्तुति के तरीकों में बदलाव के लिए प्रेरित करता है। सोशल मीडिया पर पाठकों के लाइक, शेयर और कमेंट से संस्थान को पता चलता है कि पाठकों की रुचि किस तरह की खबरों में है।
मीडिया फॉर डेमोक्रेसी मॉनिटर (एमडीएम) प्रायोजित एक शोध के मुताबिक तकनीक के नवाचार ने खबरों को लिखने, वर्तनी दोषों से बचने, संपादन करने और प्रस्तुतिकरण के तरीकों को बहुत आसान बनाया है। हाल के दिनों में भारत जैसे बहुभाषी देश में ऐसे टूल और ऐप विकसित हो गए हैं जो लैपटॉप और मोबाइल के जरिए अखबार और अन्य माध्यमों, संपादन और खबरों को प्रस्तुत करने को पूरी तरह यूजरफ्रेंडली बना चुके हैं। इसी तरह, तकनीक के नवाचार ने समाचार संकलन और प्रेषण के काम को सस्ता भी बनाया है। तभी तो उत्साही लोगों के समूह बिना ज्यादा पूंजी के ऐप के माध्यम से समाचार वेबसाइट्स, यूट्यूब चैनल और सोशल मीडिया के अन्य प्लेटफार्म से समाचार अपने पाठकों और दर्शकों तक पहुंचा पा रहे हैं। तकनीक में नवाचार का ही परिणाम है कि बिना बड़ी पूंजी लगाए कई युवा और विषयों के जानकार अपने प्लेटफार्म से अच्छी कमाई कर पा रहे हैं।
समाचार संकलन और प्रेषण में नवाचार: तकनीक के नवाचार ने सबसे ज्यादा फायदा पहुंचाया है खबरों और सूचना के संकलन और उसे यूजर्स तक पहुंचाने के काम को। ये तकनीक का कमाल है कि हम सूचना की कमी के युग से समाचारों की भरमार के दौर में आ गये हैं। इसी के साथ, हमें अपने यूजर्स तक पहुंचाने के लिए सिर्फ दो-तीन संस्थानों से मुकाबला नहीं करना पड़ रहा, बल्कि एक विषय पर हजारों वेबसाइट्स या अलग-अलग माध्यमों से मुकाबला करना पड़ रहा है। इसका मतलब है कि कंटेंट परोसने की जल्दबाजी के साथ सूचना को तथ्यपरक रखकर खुद की विश्वसनीयता बनाए रखनी पड़ रही है। इस चुनौती से निपटने में तकनीक के नवाचार ने बहुत सहूलियत पहुंचाई है। इसको एक उदाहरण से समझिए। आज खबरों के प्रसार और उससे आमदनी के सबसे बड़े साधन बन चुके सोशल मीडिया प्लेटफार्म गूगल, फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, ट्विटर आदि हैं। ये आपकी वेबसाइट और चैनल को लाखों लोगों और बडे़ भू-भाग तक पहुंचाते हैं। लेकिन, ये आपका एक और बड़ा काम करते हैं। ये आपके कंटेट की जांच परख भी करते हैं। कंटेंट ओरिजिनल है तभी चलेगा। कंटेट में अपशब्द नहीं हैं, फोटो वीभत्स नहीं है, मामला संवेदनशील तो नहीं है, सारी पड़ताल ये प्लेटफार्म खुद करते हैं। यानी पत्रकारिता में नवाचार तकनीक में नवोन्मेष के सहारे सही दिशा भी प्राप्त कर रहा है।
इसी तरह, दुनिया में तकनीक के सहारे समाचार संप्रेषण के नए प्रयोग हो रहे हैं। जैसे- टीवी एंकर के रूप में रोबोट का पदार्पण। यह प्रायोगिक रूप से सफल माना जा रहा है पर अभी आमतौर पर उपयोग में नहीं है। इसी तरह, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से डाटा ट्रांसफर और फैक्ट चेक की कई तकनीक सामने आ रही हैं। इनका उपयोग पाठकों को सही जानकारी देने में होने भी लगा है।
समाचार माध्यमों में यूजर्स की सहभागिता बढ़ाता नवाचार: पत्रकारिता में नवाचार का फायदा सबसे ज्यादा यूजर्स को मिल रहा है। माध्यम कोई हो, पाठक, दर्शक और श्रोताओं की प्रतिक्रिया प्रतिपल और सटीक मिलती रहती है। एक समय था जब अखबार ही समाचार का सबसे बड़ा माध्यम था और उसमें प्रकाशित होने वाले पाठकों के पत्र प्रतिक्रिया जानने के एकमात्र स्रोत। पत्र का स्थान ई-मेल और व्हाट्सएप ने ले लिया और अखबारों में पाठकों के पत्र प्रकाशित होने की संख्या कम होती गई। लेकिन, तकनीक के नवोन्मेष ने पत्रकारिता में पाठकों, श्रोताओं और दर्शकों को राजा बना दिया। आपकी खबर सोशल मीडिया पर आते ही पाठकों के लाइक, शेयर और कमेंट उसका भविष्य तय कर देते हैं। इसके साथ ही खबर वायरल होते ही दूसरे माध्यमों से भी प्रतिक्रिया आने लगती है।
पत्रकारिता में नवाचार की कहानी अब और भी आगे जा रही है। इससे सूचना आते ही उसकी फैक्ट चेकिंग के साधन हाथ में आते जा रहे हैं और पाठकों की राय सामने आ रही है। लगभग हर प्रमुख समाचार माध्यम में दिन की प्रमुख घटना पर पोल करवा लिया जाता है और पाठकों की राय साझा की जाती है। टीवी के अच्छे एंकर अपने कार्यक्रम के थीम पर प्रोग्राम के दौरान दर्शकों से वोट देने के लिए कहते हैं। कार्यक्रम के बाद में जनता की राय को प्रतिशत में बता देते हैं। कुछ कार्यक्रम में लाइव शो के दौरान दर्शकों को सवाल पूछने का अवसर मिलता है। कई मीडिया वेबसाइट्स अपनी हर खबर में एक पोल का ऑप्शन दे रहे हैं जिसमें चार विकल्प में से एक चुनना होता है। पोल में जितनी पाठकों की सहभागिता बढ़ती है, उतनी उस खबर की पाठकों तक पहुंच मानी जाती है।
नवाचार के मूल में भारतीय सांस्कृतिक विरासतः पत्रकारिता में नवाचार ने न्यूज क्रिएटर्स और यूजर्स दोनों के लिए राहें आसान की हैं। नवाचार की प्रक्रिया निरंतर चलने वाली है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका सबसे ज्यादा रहने वाली है। हमें ऐसी आशा रखनी चाहिए कि नवाचारों की निरंतरता से समाचारों की दुनिया और बेहतर होने वाली है। जब यूजर्स के हाथ में ताकत बढ़ेगी तो कंटेट को बेहतर और तथ्यपरक परोसने की जिम्मेदारी समाचार संस्थानों की ज्यादा होगी। तब फिर वही बात सामने होगी जो भारतीय सांस्कृतिक विरासत के मूल में है कि शब्द ब्रह्म है। नवाचार का स्वागत भी भारतीय समाज की इसी मान्यता को ध्यान में रखकर करना चाहिए।




