काले अनाज की खेती से मोटी कमाई कर रहा यह किसान
खेती में अत्यधिक रासायनिक दवाइयों के प्रयोग से जनमानस के स्वास्थ्य पर जो दुष्प्रभाव पड़ रहे हैं उसे देखते हुए किसान वापस से अपनी वैदिक और जैविक खेती की ओर लौट रहे हैं। इसी के चलते आपने अक्सर ऑर्गेनिक अथवा जैविक खेती के बारे में कहीं न कहीं सुना या पड़ा अवश्य होगा, लेकिन क्या आपने कभी जैविक काले अनाज की खेती के बारे में सुना है? जी हाँ आजकल जैविक काले अनाज की खेती काफी प्रचलन में है। इसकी खेती से किसान न केवल अलग प्रकार की खेती करने के क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहे हैं बल्कि अच्छा खासा लाभ भी कमा रहे हैं।
एक ऐसी ही खबर आई है उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से, जहाँ मेहरबानी गाँव के रहने वाले आदित्य त्यागी जैविक तरीके से काले अनाज की खेती कर रहे हैं। इससे पहले आदित्य त्यागी वन विभाग में नौकरी किया करते थे। रिटायर होने के बाद उन्होंने अपने गांव में खाली पड़ी जमीन में खेती करने के बारे में सोचा, लेकिन आजकल आम खेती में अत्यधिक मात्रा में रसायन उपयोगिता को देखते हुए उन्होंने जैविक खेती करने का निश्चय किया। शुरुआत में उन्होंने विभिन्न प्रकार की सब्जियों को जैविक तरीके से उगाना शुरु किया और पिछले दो-तीन साल से जैविक काले अनाज की खेती भी कर रहे हैं। वे अपनी फसलों पर नीम और गोमाता के पवित्र गोमूत्र से तैयार ‘नीमास्त्र’ का छिड़काव के रूप में प्रयोग करते हैं, जबकि गोमाता के गोबर को खाद के रूप में बिखेरते है।
आदित्य ने बताया कि जैविक तरीके से उगाए गए अनाज का उत्पादन भी तीन क्विंटल प्रति बीघा से अधिक निकलता है, साथ ही इसका दाम भी 4000 रुपये प्रति क्विंटल तक मिलता है। काले अनाज में एंथोसायनिन होता है, जो कैंसर की कोशिकाओं को बनने से रोकता है। साथ ही, काले अनाज की रोटी खाने से पेट भारी नहीं लगता। इससे शरीर को कई प्रकार के फायदे मिलते हैं।
इस प्रकार काले अनाज की खेती कर आदित्य त्यागी न केवल अपनी संस्कृति का संवर्धन करते हुए अच्छा लाभ कमा रहे हैं, बल्कि अन्य किसानों को भी खेती में कुछ करके अच्छा लाभ कमाने की प्रेरणा भी दे रहे हैं।