पौढ़ी, उत्तराखण्ड
उत्तराखण्ड के पहाड़ों में उगने वाला माल्टा अब केवल एक फल नहीं, बल्कि महिलाओं की आजीविका का नया माध्यम बन गया है। जिस माल्टा के छिलकों को कभी बेकार समझकर फेंक दिया जाता था, आज वही छिलके महिलाओं की किस्मत बदल रहे हैं। पौड़ी गढ़वाल की महिलाओं ने माल्टा के छिलकों को "वेस्ट टू वेल्थ" मॉडल में बदल दिया है। पहले जिन छिलकों का कोई उपयोग नहीं था, अब उनसे फेस पैक, फेस स्क्रब और हर्बल उबटन जैसे प्राकृतिक सौंदर्य उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।
महिलाएं मुल्तानी मिट्टी, चंदन, गुलाब पाउडर, हल्दी, बेसन और नीम जैसे प्राकृतिक तत्वों के साथ माल्टा के छिलकों का उपयोग कर केमिकल-फ्री हर्बल कॉस्मेटिक्स बना रही हैं। इन उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे गांवों में रोजगार और आय के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। यह पहल केवल सौंदर्य उत्पाद बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिला सशक्तिकरण की प्रेरणा भी बन रही है। जो महिलाएं कभी केवल घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित थीं, वे आज उत्पादन, पैकेजिंग, मार्केटिंग और व्यवसाय संचालन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार माल्टा के छिलकों में विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो त्वचा के लिए लाभकारी माने जाते हैं। यही कारण है कि सिट्रस आधारित स्किन केयर उत्पादों की मांग देश-दुनिया में तेजी से बढ़ रही है। 'हिलांस' जैसे स्थानीय ब्रांड इन उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। इससे न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, बल्कि पहाड़ों से होने वाले पलायन को रोकने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
जो छिलके कभी कूड़ेदान में चले जाते थे,
आज वही रोजगार, आत्मनिर्भरता और नई पहचान का माध्यम बन
रहे हैं। यह पहल 'वोकल
फॉर लोकल' और आत्मनिर्भर भारत
की भावना को मजबूत करने का एक प्रेरणादायक उदाहरण है।



