सनातन धर्म का मूल मंत्र है परोपकार। जरूरतमंदों की सेवा
हमारे पुराणों में पाप और पुण्य की बड़ी सरल परिभाषा है और वह है आपके जिस कर्म से किसी को पीड़ा पहुँचती है, दुःख पहुँचता है, वह पाप है
और आपके जिस कर्म से किसी की पीड़ा दूर होती है, उसका दुःख मिटकर उसे सुख मिलता है वही कर्म पुण्य है यही सनातन हिन्दू धर्म का सार है और इसी सार को धारण कर हिन्दू जन अपने जीवन को सफल करते आये हैं इसका एक उदाहरण हैं मथुरा में रहने वाले युवक राहुल अग्रवाल ने एक बार अपनी यात्रा के दौरान रेलवे स्टेशन पर कुछ भूखे लोगों को देखा तो उन्हें भोजन करा दिया, उनके मन में विचार आया कि ऐसे कई लोग हमारे आस पास ही हैं, जिन्हें भूखा सोना पड़ता है
उन्होंने दो अगस्त 2017 से रेलवे जंक्शन पर सप्ताह में एक दिन 50 जरूरतमंदों को भोजन के पैकेट बांटने की शुरुआत की। धीरे धीरे उनके इस पुनीत कार्य में और लोगों का सहयोग भी मिलने लगा तो 14 मई 2018 को अन्नपूर्णा फाउंडेशन की शुरुआत कर उन्होंने होली गेट, भूतेश्वर और रेलवे जंक्शन पर अन्नपूर्णा क्षेत्र बनाकर नियमित रूप से भोजन वितरण की शुरुआत कर दी।
जो दिव्यांग दिव्यांग बन्धु भगिनी भोजन लेने नहीं आ पाते हैं उनके लिए वे प्रतिदिन दो अन्नपूर्णा रथ लेकर शहर में भ्रमण कर उन्हें भोजन उपलब्ध कराते हैं। मानव सेवा ही राजीव जी और उनकी टीम के लिए धर्म है, जिसकी सीख उन्हें सनातन मूल्यों से मिली है।