- राज्य सरकारों ने मदरसों में एनसीईआरटी की किताबें लागू करने का लिया निर्णय
- प्रदेश सरकार के मंत्री धर्मपाल सिंह ने उठाया, नहीं दिया जवाब
उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के मदरसों में एनसीईआरटी की किताबों के गायब होने और इससे जुड़े विवाद ने प्रशासन और शिक्षा विभाग पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य सरकार ने आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 2017-18 से मदरसों में एनसीईआरटी की किताबें लागू करने का निर्णय लिया था। इसके तहत गणित और विज्ञान जैसे विषयों की किताबें उर्दू में उपलब्ध कराई जानी थीं, और शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया था। इस मामले में उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री धर्मपाल सिंह ने सवाल उठाया है। उन्होंने मदरसों में एनसीईआरटी की किताबों के गायब होने और इसके प्रभावी क्रियान्वयन में देरी को लेकर संबंधित विभाग से जवाब मांगा है। हालांकि, विभाग ने अभी तक इस पर कोई ठोस जवाब नहीं दिया है।
हाल ही में यह मामला सामने आया कि कुछ मदरसों में ये किताबें उपलब्ध नहीं हैं या गायब हो गई हैं। मंत्री द्वारा इस पर जवाब मांगे जाने के बावजूद संबंधित विभाग ने अभी तक स्पष्ट स्थिति नहीं दी है। मदरसा बोर्ड ने इस सिलेबस को लागू करने की सख्ती की बात कही थी, लेकिन इसके क्रियान्वयन में समस्याएं आ रही हैं, जैसे संसाधनों की कमी और स्थानीय स्तर पर विरोध। कुछ उलेमा और शिक्षकों का कहना है कि इस प्रकार की शिक्षा थोपने से उनकी पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होगी।